मोदी के भाषण में भ्रष्टाचार का खुलासा
साथियों,
दिल थाम कर बैठिये। आज हम मोदी जी के भाषण में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा करने जा रहे हैं। यद्यपि आप सब और मीडिया वालों की आँखों में मोदी जी ने धूल झोंक दिया, परन्तु हमारे युगपुरुष श्री श्री केजरीवाल जी की दिव्य एवं अलौकिक दृष्टि से बच पाना कठिन ही नहीं असंभव है (ठीक वैसे ही जैसे डॉन को ढून्ढ पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है!)
प्रसन्न तो अत्यधिक हुए होंगे सब (खुश तो बहुत होगे तुम, हांय) मोदी जी के भाषण सुन कर, पर हमारे युगपुरुष जी की दृष्टि इस मीठे भाषण के पीछे छिपे संघी-भाजपाई एजेंडे को भांप गयी। आज तक किसी प्रधानमंत्री ने भाषण देते समय पगड़ी पहनी? नहीं ना? हम मनमोहन जी की बात नहीं कर रहे। ऊपर से पगड़ी का रंग केसरिया! उसपर भी केसरिया पगड़ी की पूँछ का छोर हरा! ये तो सरासर कम्युनल काम हो गया! क्या कहना चाहते हैं ये संघी-भाजपाई इस कलर-कॉम्बिनेशन से? हरा रंग पगड़ी के पूंछ पर ही क्यों था? ये भी तो हो सकता था कि पगड़ी हरे रंग की होती और उसकी पूंछ केसरिया। पर ऐसा नहीं किया इन कम्युनल और भ्रष्ट लोगों ने। क्या किसी को पता है कि इस पगड़ी के कपडे को कहाँ से खरीदा गया? किसने बांधा, इसके लिए कितने पैसे दिए गए? कोई रसीद बनाई गयी या नहीं? नहीं ना? यही तो स्कॅम है, साथियों! इसी के लिए तो हम लड़ रहे हैं!
एक और बात पर युगपुरुष जी ने ध्यान दिया - मोदी जी तो बिना किसी कागज़, बिना किसी नोट के लगातार भाषण दिए जा रहे थे। इतना लम्बा भाषण उन्होंने याद कैसे रखा? याद तो हमारे युगपुरुष भी रख सकते हैं पर इतने लम्बे भाषण को यदि कागज़ पर लिखा होता तो सोचिये कितने कागज़ लगते! वो सारे कागज़ यदि बच गए तो इस बचत से जमा पैसों का हिसाब-किताब कहाँ है? कहाँ और किसकी जेब में गए वो सारे पैसे? साथियों, यही तो स्कॅम है, इसके लिए ही तो हम संघर्ष कर रहे हैं !
इन सारी बातों से एक कदम और आगे के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश तो अभी बाकी ही है। जब युगपुरुष श्री श्री केजरीवाल जी और अति अति बुद्धिमान एवं सुंदरता की मूरत श्री आशुतोष (वही "आशुतोष, दिल्ली, आजतक" वाले) साथ बैठ कर मोदी जी का भाषण सुन रहे थे तो श्री आशुतोष जी को ज़ोरों की हंसी आ गयी। पूछने पर उन्होंने अपनी हंसी का खुलासा किया (खुलासा-खुलासा हम आपियों का प्रिय खेल है)… बोले कि देखो कैसे मोदी जी की पगड़ी की पूँछ हवा में लहरा रही है, और गाने लगे - "हवा में उड़ता जाये, मेरी पगड़ी की पूँछ, हो जी हो जी.…", इतने में मोदी जी के माइक में ज़ोर की हवा चली और टीवी पर फू-फू की ध्वनि सुनाई देने लगी। युगपुरुष की चमत्कारी खोपड़ी में विचारों के घोड़े अब पूरी गति से दौड़ रहे थे - कि पहले कभी ये फू-फू की ध्वनि किसी प्रधान मंत्री के भाषण में इतना परेशान नहीं करती थी, फिर आज क्यों? और तभी ख़ोपड़िया के जंगल में तेज़ बिजली कौंधी - "ओत्तेरी! ये तो बिना बुलेटप्रूफ केबिन के भाषण दे रहे हैं!" और सारी बात दर्पण की भाँती साफ हो गयी। साथियों, वो बुलेटप्रूफ केबिन आखिर गया कहाँ? अवश्य इन भ्रष्ट भाजपाईयों ने उसे कहीं बेच दिया होगा। बेचा तो बेचा, उसकी रसीद कहाँ है? कितने में बेचा? किसको बेचा? देश जानना चाहता है। यही तो स्कॅम है ! यही तो भ्रष्टाचार है! इसके लिए ही तो हम लड़ रहे हैं!
हमें पता है साथियों, ये अडानी और अम्बानी के एजेंट, ये संघी-भाजपाई, ये भ्रष्ट और कम्युनल लोग इस बात कह कर छिपाएंगे की ये तो मोदी जी की दिलेरी है कि उन्होंने बुलेटप्रूफ केबिन का प्रयोग नहीं किया। कहेंगे कि ये तो मोदी जी के ५६ इंच के सीने का कमाल है, पर क्या किसी ने मोदी जी के सीने का सचमुच नाप लिया? है कोई सर्टिफिकेट? नहीं ना? यही तो स्कॅम है ! इसके लिए ही तो हम लड़ रहे हैं!
दिल थाम कर बैठिये। आज हम मोदी जी के भाषण में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा करने जा रहे हैं। यद्यपि आप सब और मीडिया वालों की आँखों में मोदी जी ने धूल झोंक दिया, परन्तु हमारे युगपुरुष श्री श्री केजरीवाल जी की दिव्य एवं अलौकिक दृष्टि से बच पाना कठिन ही नहीं असंभव है (ठीक वैसे ही जैसे डॉन को ढून्ढ पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है!)
प्रसन्न तो अत्यधिक हुए होंगे सब (खुश तो बहुत होगे तुम, हांय) मोदी जी के भाषण सुन कर, पर हमारे युगपुरुष जी की दृष्टि इस मीठे भाषण के पीछे छिपे संघी-भाजपाई एजेंडे को भांप गयी। आज तक किसी प्रधानमंत्री ने भाषण देते समय पगड़ी पहनी? नहीं ना? हम मनमोहन जी की बात नहीं कर रहे। ऊपर से पगड़ी का रंग केसरिया! उसपर भी केसरिया पगड़ी की पूँछ का छोर हरा! ये तो सरासर कम्युनल काम हो गया! क्या कहना चाहते हैं ये संघी-भाजपाई इस कलर-कॉम्बिनेशन से? हरा रंग पगड़ी के पूंछ पर ही क्यों था? ये भी तो हो सकता था कि पगड़ी हरे रंग की होती और उसकी पूंछ केसरिया। पर ऐसा नहीं किया इन कम्युनल और भ्रष्ट लोगों ने। क्या किसी को पता है कि इस पगड़ी के कपडे को कहाँ से खरीदा गया? किसने बांधा, इसके लिए कितने पैसे दिए गए? कोई रसीद बनाई गयी या नहीं? नहीं ना? यही तो स्कॅम है, साथियों! इसी के लिए तो हम लड़ रहे हैं!
एक और बात पर युगपुरुष जी ने ध्यान दिया - मोदी जी तो बिना किसी कागज़, बिना किसी नोट के लगातार भाषण दिए जा रहे थे। इतना लम्बा भाषण उन्होंने याद कैसे रखा? याद तो हमारे युगपुरुष भी रख सकते हैं पर इतने लम्बे भाषण को यदि कागज़ पर लिखा होता तो सोचिये कितने कागज़ लगते! वो सारे कागज़ यदि बच गए तो इस बचत से जमा पैसों का हिसाब-किताब कहाँ है? कहाँ और किसकी जेब में गए वो सारे पैसे? साथियों, यही तो स्कॅम है, इसके लिए ही तो हम संघर्ष कर रहे हैं !
इन सारी बातों से एक कदम और आगे के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश तो अभी बाकी ही है। जब युगपुरुष श्री श्री केजरीवाल जी और अति अति बुद्धिमान एवं सुंदरता की मूरत श्री आशुतोष (वही "आशुतोष, दिल्ली, आजतक" वाले) साथ बैठ कर मोदी जी का भाषण सुन रहे थे तो श्री आशुतोष जी को ज़ोरों की हंसी आ गयी। पूछने पर उन्होंने अपनी हंसी का खुलासा किया (खुलासा-खुलासा हम आपियों का प्रिय खेल है)… बोले कि देखो कैसे मोदी जी की पगड़ी की पूँछ हवा में लहरा रही है, और गाने लगे - "हवा में उड़ता जाये, मेरी पगड़ी की पूँछ, हो जी हो जी.…", इतने में मोदी जी के माइक में ज़ोर की हवा चली और टीवी पर फू-फू की ध्वनि सुनाई देने लगी। युगपुरुष की चमत्कारी खोपड़ी में विचारों के घोड़े अब पूरी गति से दौड़ रहे थे - कि पहले कभी ये फू-फू की ध्वनि किसी प्रधान मंत्री के भाषण में इतना परेशान नहीं करती थी, फिर आज क्यों? और तभी ख़ोपड़िया के जंगल में तेज़ बिजली कौंधी - "ओत्तेरी! ये तो बिना बुलेटप्रूफ केबिन के भाषण दे रहे हैं!" और सारी बात दर्पण की भाँती साफ हो गयी। साथियों, वो बुलेटप्रूफ केबिन आखिर गया कहाँ? अवश्य इन भ्रष्ट भाजपाईयों ने उसे कहीं बेच दिया होगा। बेचा तो बेचा, उसकी रसीद कहाँ है? कितने में बेचा? किसको बेचा? देश जानना चाहता है। यही तो स्कॅम है ! यही तो भ्रष्टाचार है! इसके लिए ही तो हम लड़ रहे हैं!
हमें पता है साथियों, ये अडानी और अम्बानी के एजेंट, ये संघी-भाजपाई, ये भ्रष्ट और कम्युनल लोग इस बात कह कर छिपाएंगे की ये तो मोदी जी की दिलेरी है कि उन्होंने बुलेटप्रूफ केबिन का प्रयोग नहीं किया। कहेंगे कि ये तो मोदी जी के ५६ इंच के सीने का कमाल है, पर क्या किसी ने मोदी जी के सीने का सचमुच नाप लिया? है कोई सर्टिफिकेट? नहीं ना? यही तो स्कॅम है ! इसके लिए ही तो हम लड़ रहे हैं!
Labels:
AAP,
Arvind kejriwal,
BJP,
bulletproof cabin,
Comedy,
Hindi,
Independence day,
khulasa,
Lal Qila,
NaMo,
Narendra Modi,
PM,
Politics,
Prime Minister,
sarcasm,
satire,
secularism,
Shazia Ilmi,
Speech
Subscribe to:
Post Comments (Atom)



आपके पोस्ट का एक हिस्सा चुरा रहा हूँ . .
ReplyDeleteमैं कृतार्थ हुआ, बंधुवर। लोग तो पूरा आलेख उठा ले जाते हैं और नाम भी नहीं लेते! आपको मेरा आलेख पसंद आया तथा उसका एक भाग लेते हुए आपने रुक कर मुझे सूचित किया, इसके लिए मेरा मनःपूर्वक धन्यवाद। कृपया यदि आपको कोई अन्य आलेख पसंद आये तो मेरे ब्लॉग को अपने मित्रों के संग अवश्य साझा करियेगा। :)
DeleteLike Like Like..You are awesome bro
ReplyDeleteThankyou so much. you have no idea how much every positive comment helps to keep up the motivation to keep writing. :D
DeleteAwesome..
ReplyDelete.YR kya khopadi pai..Hai
adhbhut BHratha SHREE!
ReplyDelete